नवरात्रि की नौ देवियाँ और नौ योगासन

नवरात्रि की नौ देवियाँ और नौ योगासन
NAVRATRI – 9 DAYS • 9 YOGASANAS
नवरात्रि केवल नौ दिनों तक चलने वाला धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति, साधना, संयम, आत्मबल और आत्मिक उन्नति की नौ-दिवसीय यात्रा का प्रतीक भी है।
सनातन परंपरा में नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों— माँ शैलपुत्री, माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कूष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री— की आराधना की जाती है।
इसी दिव्य भावना को योग साधना से जोड़ते हुए अखिल भारतीय योग महासंघ (ABYM) द्वारा “NAVRATRI – 9 DAYS • 9 YOGASANAS” अभियान की संकल्पना की गई है।
इस अभियान में नवरात्रि के नौ दिव्य स्वरूपों को नौ चयनित योगासनों के साथ प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा गया है, ताकि देवी-आराधना के साथ योग के माध्यम से शरीर, मन और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संतुलन एवं आत्मबल का विकास किया जा सके।
🌺 नवरात्रि और योग का अद्भुत संबंध
नवरात्रि हमें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसे सकारात्मक दिशा में लगाने की प्रेरणा देती है।
योग दूसरी ओर हमें अपने शरीर, श्वास, मन और चेतना के साथ जुड़ने का अवसर देता है।
जब नवरात्रि की नवशक्ति और योग की साधना एक साथ आती है, तो यह केवल आसनों का अभ्यास नहीं रह जाता, बल्कि एक सुंदर जीवन-संदेश बन जाता है।
मन में संतुलन,
विचारों में सकारात्मकता,
जीवन में अनुशासन
और चेतना में जागरण।
🌺 माँ शैलपुत्री
🧘 ताड़ासन — स्थिरता, संतुलन और दृढ़ संकल्प

नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना की जाती है। शैलपुत्री अर्थात् पर्वत की पुत्री। पर्वत स्थिरता, धैर्य, मजबूती और अडिग संकल्प का प्रतीक है।
इसी भाव के साथ इस अभियान में ताड़ासन को माँ शैलपुत्री से जोड़ा गया है।
ताड़ासन में शरीर को सीधा और संतुलित रखते हुए ऊपर की ओर विस्तार का अभ्यास किया जाता है। यह शरीर की स्थिति, संतुलन और सजगता पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देता है।
जिस प्रकार पर्वत विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी स्थिरता बनाए रखता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में अपने सकारात्मक संकल्पों के प्रति दृढ़ रहना चाहिए।
🌺 माँ ब्रह्मचारिणी
🧘 वज्रासन — तप, संयम और अनुशासन

दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप तपस्या, साधना, संयम और दृढ़ संकल्प की भावना से जुड़ा है।
इसी कारण इस अभियान में वज्रासन को माँ ब्रह्मचारिणी के साथ जोड़ा गया है।
वज्रासन ध्यान, जप और साधना के लिए उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक आसनों में से एक है। इसमें शरीर को स्थिर रखते हुए साधक अपने मन को भीतर की ओर केंद्रित करने का प्रयास करता है।
🌺 माँ चंद्रघंटा
🧘 अर्धचंद्रासन — संतुलन, शांति और साहस

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनके स्वरूप में शक्ति, साहस और संतुलन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
इस अभियान में माँ चंद्रघंटा को अर्धचंद्रासन से जोड़ा गया है।
अर्धचंद्रासन में शरीर को संतुलित रखते हुए स्थिरता और एकाग्रता का अभ्यास किया जाता है। यह हमें यह प्रतीकात्मक संदेश देता है कि जीवन में शक्ति के साथ संतुलन और शांति भी आवश्यक है।
🌺 माँ कूष्मांडा
🧘 उष्ट्रासन — ऊर्जा, विस्तार और सृजनशीलता

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की आराधना की जाती है। देवी के इस स्वरूप को सृजनात्मक ऊर्जा और जीवनदायिनी शक्ति से जोड़ा जाता है।
इस अभियान में माँ कूष्मांडा के साथ उष्ट्रासन को जोड़ा गया है।
उष्ट्रासन में शरीर के अग्रभाग का विस्तार होता है और वक्षस्थल खुलता है। प्रतीकात्मक रूप से यह आसन हमें अपने भीतर मौजूद ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मक क्षमता को पहचानने की प्रेरणा देता है।
🌺 माँ स्कंदमाता
🧘 वीरभद्रासन–1 — मातृशक्ति, संरक्षण और वीरता

पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की आराधना की जाती है। वे भगवान स्कंद अर्थात् कार्तिकेय की माता के रूप में पूजित हैं।
मातृत्व केवल प्रेम और करुणा का स्वरूप नहीं है, बल्कि उसमें संरक्षण, त्याग, साहस और शक्ति भी निहित है।
इसी भाव को इस अभियान में वीरभद्रासन–1 से जोड़ा गया है।
वीरभद्रासन–1 शरीर में शक्ति, स्थिरता और दृढ़ता के अभ्यास का अवसर देता है। इसका प्रतीकात्मक संदेश है कि मातृशक्ति अपने परिवार और समाज के संरक्षण तथा निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
🌺 माँ कात्यायनी
🧘 उत्कट कोणासन — शक्ति, आत्मविश्वास और निर्भीकता

छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना की जाती है। देवी कात्यायनी को शक्ति और वीरता के स्वरूप से जोड़ा जाता है।
इस अभियान में उनके साथ उत्कट कोणासन को जोड़ा गया है।
यह आसन शरीर के निचले भाग में शक्ति और स्थिरता के अभ्यास के साथ आत्मविश्वास एवं दृढ़ता की भावना को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करता है।
🌺 माँ कालरात्रि
🧘 सिंहासन — भय पर विजय और निर्भीकता

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप उग्र शक्ति और नकारात्मकता तथा भय पर विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
इस अभियान में माँ कालरात्रि को सिंहासन से जोड़ा गया है।
सिंहासन में सिंह की निर्भीकता और शक्ति का प्रतीकात्मक भाव दिखाई देता है। यह साधक को अपने भीतर के भय, संकोच और नकारात्मक भावों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
🌺 माँ महागौरी
🧘 शशांकासन — शांति, शुद्धता और आत्मनिरीक्षण

आठवें दिन माँ महागौरी की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप शांति, पवित्रता और निर्मलता से जुड़ा हुआ माना जाता है।
इस अभियान में माँ महागौरी के साथ शशांकासन को जोड़ा गया है।
शशांकासन शरीर और मन को अपेक्षाकृत विश्राम की अवस्था में लाने वाला योगाभ्यास है। यह साधक को भीतर की ओर देखने, शांत होने और आत्मनिरीक्षण करने का अवसर देता है।
🌺 माँ सिद्धिदात्री
🧘 पद्मासन — ध्यान, स्थिरता और आत्मिक पूर्णता

नवरात्रि के अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। देवी सिद्धिदात्री का स्वरूप सिद्धि और आध्यात्मिक पूर्णता की भावना से जुड़ा है।
इस अभियान की नौवीं और अंतिम साधना है पद्मासन।
पद्मासन भारतीय योग परंपरा में ध्यान और स्थिरता से जुड़ा प्रमुख आसन है। नौ दिनों की साधना यात्रा के अंतिम चरण में यह आसन बाहरी गतिविधि से भीतर की चेतना की ओर जाने का प्रतीक बनता है।
🌸 नौ देवियाँ और नौ योगासन — एक नजर में
| दिन | देवी स्वरूप | योगासन | प्रतीकात्मक भाव |
|---|---|---|---|
| 1 | माँ शैलपुत्री | ताड़ासन | स्थिरता, संतुलन एवं संकल्प |
| 2 | माँ ब्रह्मचारिणी | वज्रासन | तप, संयम एवं अनुशासन |
| 3 | माँ चंद्रघंटा | अर्धचंद्रासन | संतुलन, शांति एवं साहस |
| 4 | माँ कूष्मांडा | उष्ट्रासन | ऊर्जा, विस्तार एवं सृजन |
| 5 | माँ स्कंदमाता | वीरभद्रासन–1 | मातृशक्ति, संरक्षण एवं वीरता |
| 6 | माँ कात्यायनी | उत्कट कोणासन | शक्ति, आत्मविश्वास एवं निर्भीकता |
| 7 | माँ कालरात्रि | सिंहासन | भय पर विजय एवं निर्भीकता |
| 8 | माँ महागौरी | शशांकासन | शांति, शुद्धता एवं आत्मनिरीक्षण |
| 9 | माँ सिद्धिदात्री | पद्मासन | ध्यान, स्थिरता एवं आत्मिक पूर्णता |
🌺 स्वस्थ मातृशक्ति • स्वावलंबी मातृशक्ति • स्वाधीन मातृशक्ति
अखिल भारतीय योग महासंघ (ABYM) का यह अभियान इस विचार को आगे बढ़ाता है कि एक स्वस्थ और सशक्त परिवार के निर्माण में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसलिए इस नवरात्रि का संदेश केवल देवी की आराधना तक सीमित न रहे।
- योग अपनाएँ।
- स्वास्थ्य अपनाएँ।
- आत्मबल बढ़ाएँ।
- परिवार को योग से जोड़ें।
- समाज को स्वस्थ एवं सशक्त बनाने का संकल्प लें।
🌸 इस नवरात्रि एक नया संकल्प लें
नवरात्रि में हम माँ के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। इस बार उनके गुणों को अपने जीवन में उतारने का भी प्रयास करें।
पहले दिन — स्थिरता का संकल्प।
दूसरे दिन — अनुशासन का संकल्प।
तीसरे दिन — संतुलन का संकल्प।
चौथे दिन — सकारात्मक ऊर्जा का संकल्प।
पाँचवें दिन — मातृशक्ति के सम्मान का संकल्प।
छठे दिन — निर्भीकता का संकल्प।
सातवें दिन — भय पर विजय का संकल्प।
आठवें दिन — शांति और शुद्धता का संकल्प।
नौवें दिन — आत्मचिंतन और आत्मिक उन्नति का संकल्प।
यही नवशक्ति से योगशक्ति तक की यात्रा है।
🧘 NAVRATRI – 9 DAYS • 9 YOGASANAS
अखिल भारतीय योग महासंघ (ABYM) द्वारा आयोजित यह अभियान लोगों को नवरात्रि के नौ दिनों में नौ योगासनों के अभ्यास से जोड़ने का एक प्रयास है।
नौ दिन • नौ देवियाँ • नौ योगासन • एक संकल्प
स्वस्थ और सशक्त समाज
आइए, इस नवरात्रि देवी की आराधना के साथ योग को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
जय माता दी। 🙏
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
अखिल भारतीय योग महासंघ (ABYM)


